Mission to Establish Karmology, Nothing Else -2

– पांच तत्वों व तीनों गुणों से मिलकर बना है “भौतिक जगत का वह पूर्ण ब्रह्माण्ड तथा हमारा भौतिक शरीर रूपी यह सूक्ष्म ब्रह्माण्ड” यदि हम अपने नियत कर्मों के ज्ञान से अपने पांचों तत्वों के अनुपात व तीनों गुणों की गुणवत्ता को सन्तुलित या ट्यून्ड कर पाते है तो हमारे सातों चक्राज़ की एनर्जी अनुकूल प्रभाव देने लगती है तभी ब्रह्माण्ड के ग्रह नक्षत्र राशियों की एनर्जी भी फेवरेबल होती जाती हैं।

– हमारे नियत/ निर्धारित कर्मों के कोड्स हमारे इस शरीर की व्यक्तिगत स्थिर चीजों से ही निकाले जा सकते है जो हमारे शरीर में कभी नही बदलते। वे होती है इस भौतिक शरीर के हाथ पांव के पंजों में बनने वाली उभरी हुई क्षोपक/ संघर्षक सूक्ष्म रेखाएं (Thumb, finger prints) जो ना कभी बदलती है और ना ही किसी से समान रूप से मिलती है बल्कि QR codes की तरह सबकी अलग होती है। इसकी ग्राफिक स्टडी से ही आपकी जीवात्मा soul के एथेरिक कोड्स निकाल कर आपकी पास्ट लाइफ के कार्मिक कोड्स निकाले जाते है तब हमारे व्यक्तिगत, इस भौतिक शरीर के जेनेटिक कोड्स निकलते है।

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश इन पांच तत्वों तथा सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण इन तीनों गुणों से मिल कर बनता है पूर्ण ब्रह्माण्ड और इन्ही आठों भौतिक पदार्थों से बनता है ये हमारा भौतिक शरीर इन कुल आठ भौतिक तत्वों व गुणों का अनुपात हर शरीर में पर्सनली अलग-अलग होता है। जिस तरह से सात सुरों से अनन्त धुनें बन जाती है उसी प्रकार उपरोक्त आठों से अनन्त शरीर बनता है। व्यक्ति विशेष की अनुपातिक तकनीकी गणना व ग्राफिक स्टडी से निकाले जाते है व्यक्ति विशेष के वे व्यक्तिगत निर्धारित कर्म जिनको करने के लिए ही वह व्यक्ति विशेष मनुष्य की कर्म योनि में जन्मा है। जिन व्यक्तिगत कर्मों के करने का अधिकार विश्व में एकमात्र उसी व्यक्ति विशेष का है जिसके वे नियत कर्म है और उसका अनुपालन करना उसका अनिवार्य कर्तव्य होता है; जिनका कर लेना उस व्यक्ति विशेष का निज स्वधर्म है जिसका ना करना स्वतः ही अधर्म है। इस तरह से व्यक्ति विशेष के अपने नियत कर्म ही उसके इस जन्म के अपने निर्धारित कर्म है और वही उसका अपना निज स्व-धर्म है। इसी नियत कर्म ज्ञान को ‘कर्मोलॉजी’ कहते है। इस प्रकार उपरोक्त निकाले कोड्स व नियत कर्मों से तैयार किया जाता है आपका अपना “कोड ऑफ कर्मा” अर्थात् आपकी अपनी निज व्यक्तिगत ‘कर्मसंहिता’।

पाप पुण्य से सम्बन्धित सभी मनुष्यों के लिए यूनिफॉर्म रूप में जो धर्मादिश होते है, वे सब ‘कर्म’ कहलाते है और लगभग सभी धर्म ग्रन्थों में इनका उल्लेख है। इस प्रकार धर्म ही पूरी मनुष्य जाति के लिए बताए गए कर्म है, लेकिन हथेलियों में जन्म के समय एक्टिवेट होने वाली उभरी हुई ब्रह्माण्डीय, चुम्बकीय सर्किट फिक्वशन रिज़ेज़ थम्ब, फिंगर प्रिन्ट उस व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षोपक रेखाएं होती है तथा इन्ही की सूक्ष्म गणना से निकाले गए कोड्स व व्यक्तिगत कर्माज़ ही गीता में उल्लेखित ‘नियत कर्म’ ‘Destined fixed Karmas’ कहलाते है। ये पर्सनली प्रकृति के तीनों गुणों – सतो, रजो, तमो के आधीन पंच तत्वों के अनुपातिक तकनीक से निकाले गए होते है तब बनता है “Your own personal Code of Karma” जिसको अपना कर आप अपने ही पूर्ण तत्व ज्ञानी बन कर खुद की मदद करने लायक खुद हो जाते है। आपको सटीक जानकारी हो जाती है कि आपके लिए क्या हितकारी है क्या नहीं। इस प्रकार अपने नियत-कर्मों को जीवन की दिनचर्या में उतारते हुए आप पोजिटिव एनर्जी से अपने आप को हाउस फुल कर लेते है इससे आपके जीवन में कोई किसी भी प्रकार की नेगेटिविटी प्रवेश की कोई जगह ही नहीं रहती।

जिस तरह से अपने कम्प्यूटर डिवाइस में एन्टी वायरस लगाकर अपने डिवाइस को आप सुरक्षित कर लेते है वैसे ही कर्मोलॉजी की जानकारी से बाधक परेशान करने वाली ऊर्जाओं से आप अपनी सुरक्षा बखूबी कर पाते है। जिस तरह एक सामान्य फोन से सिम निकाल कर एन्ड्रॉइड फोन में डालकर बहुत सारी खास स्थिति पा ली जाती है जो एक साधारण फोन से प्राप्त नहीं हो पा रही थी। इसी तरह जब नियत कर्मशील व्यक्ति का शरीर रूपी डिवाइस, जीवात्मा के लिए, अपने नियत कर्मों से बना ऊर्जावान, कर्मवान खास शरीर बना लेता है तो वह बहु उपयोगी, पूर्ण सार्थक व सफल योग बना पाता है, जो केवल एफर्ट या मेहनत से नहीं बनते क्योंकि ठीक प्रयास व श्रम में आपके नियत कर्म नहीं जुड़े होते।

जिस प्रकार एक फोन का सिम, जिस तरह के गुणवत्ता वाले फोन में ट्रान्सप्लान्ट किया जाएगा वो उसी तरह की खूबियां बढ़ा लेगा। अब आपके एन्ड्रॉइड फोन में कौन-कौन से सॉफ्टवेयर व एप्स डाउनलोड किए गए है उसकी उपयोगिता इस पर निर्भर करती है। वो आपके लिए कितना उपयोगी है यह आपकी जानकारी पर निर्भर करता है। इसी प्रकार हम जीवात्मा ने सबसे बेहतर मनुष्य योनि का शरीर पा तो लिया है हार्डवेयर तो बढ़िया मिल गया है पर जिस सॉफ्टवेयर की आवश्यकता है वो तो डाउनलोड हुए ही नही। अतः जो हम जीवन में चाहते है वो पा ही नही पाते। कर्मोलॉजी के अन्तर्गत जीवन में प्रकृति और परमात्मा से अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को डाउनलोड करने की नॉलेज को ‘कोड ऑफ कर्मा’ कहा जाता है, जिससे आप अपनी इस प्रकार से मदद कर पाते है कि परमनियन्ता परमात्मा भी आपकी मदद करने को उत्सुक व तत्पर हो जाता है।

इस स्थिति को पाने के लिए अपने निर्धारित कर्मों के पूर्ण ज्ञान को पाकर अपने जीवन में उनको फॉलो करने की आवश्यकता होती है। यदि हम ऐसा कर रहे होते है तो हम खुद की मदद कर रहे होते है तभी उपर वाला भी हमारी मदद कर पाता है वर्ना नहीं। अपने ‘कोड ऑफ कर्मा’ द्वारा आप अपने खास नियत कर्मों से अपने पूर्व जन्म के दोषों को ठीक ऐसे काट रहे होते है जैसे लोहा ही लोहे को काटता है, और हीरा ही हीरे को काटता है।

ध्यान रहे जब तक पास्ट लाइफ की गड़बड़ियां आपके इस जीवन में मौजूद रहेंगी तब तक आपकी मदद परमात्मा भी नही कर सकता औरों की तो बात ही अलग है, अन्य कोई तो मदद कर ही नही सकता।

आप अपने प्रारब्ध, भाग्य को इसलिए बदल पाते है क्योंकि आप पुराने दोषपूर्ण कर्मों को तो ‘कोड ऑफ कर्मा’ से अपने निर्धारित कर्म जानकर काट रहे होते है जोकि किसी पूजापाठ या अनेक प्रकार के उपायों से नही कट सकते है। पुण्य कार्य, पूजा, उपाय, जाप, अनुष्ठान ये सब तो आपके पुण्यों में जुड़ जाते है लेकिन पिछले दोषपूर्ण कर्मों को नहीं काट पाते। इसलिए उपायों से थोड़े समय के लिए मात्र राहत ही मिल पाती है। लेकिन नियत कर्मों का फल इस जन्म के साथ-साथ अगले जन्मों में भी मिलता है हमारे कर्म शरीर छूटने के बाद में भी हमारे साथ होते है, जितने भी संसार में top position पर सफल व्यक्ति है वो पास्ट लाइफ में किए गए नियत कर्मों वाली जीवात्मा है। इसलिए अब वे अपने इस जन्म में भरपूर लदे हुए नियत कर्म फल पा रहे है।

इसलिए हर मनुष्य के लिए व्यक्तिगत संदेश है कि अपना कर्म योनि का जन्म यूं ही ना बिताइए अपने नियत/ निर्धारित कर्म अपनाइए। Astrology बहुत महत्वपूर्ण भाग है हमारे जीवन का क्योंकि जिस तरह एक चिकित्सक के लिए अपने मरीज की pathological Reports की विभिन्न जांचें test आदि चिकित्सा का pattern अपनाने के लिए उपयोगी होती है ताकि पता चल सके कि मरीज के शरीर में क्या ठीक चल रहा है, क्या गड़बड़ियां है। इसी तरह हमारे जीवन की गड़बड़ियों को ठीक किए बगैर ये जीवन व अगला जीवन ठीक होना सम्भव नहीं होता है। ये सब जानकारियां कर्मोलॉजी के अन्तर्गत अपने नियत कर्मों से होती है। ये सब व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग कर्मोलॉजी के माध्यम से ही पता चल पाता है। क्या अनिवार्य रूप से करना है क्या निषेध रूप से मना है। चाहे धर्म समाज में कोई कार्य कितना ही अच्छा माना जाता हो यदि आपके लिए मना है तो उसे नहीं करना होता है ताकि आपके भाग्य व भविष्य की ऊर्जाएं आपके फेवर में ही काम करें।

इस ज्ञान को पाने के लिए आप परमात्मा से प्रार्थना अवश्य करें ताकि आपके व्यक्तिगत नियत कर्मों का ज्ञान आपको प्राप्त हो सके ताकि जिसके अपनाने के बाद पूर्ण परमात्मा आपकी पूर्ण मदद कर सकें जिससे आप अपना मनचाहा भाग्य भविष्य बनाने में अपने पूर्ण मददगार हो सकें। इसी लिए तो उर्दू में भी कहा गया है ‘खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से पूछे बता तेरी रज़ा क्या है?’

खुद की मदद करना सीखें, क्योंकि ‘जो खुद की मदद करता है उसी की खुदा मदद करता है’ तभी गर्दिश में डूबे आपके सितारे बुलन्द हो पाते है।

इसका मतलब यही है कि हम अपनी कॉस्मिक एनर्जी को ट्यून करके प्रॉपर प्लेसमेंट ऐसे दे दें कि एनर्जी का वाइब्रेशन अपने फेवर में ही काम करे। डिस्ट्रक्टिव की जगह कन्स्ट्रक्टिव हो जाए। इसके लिए चाहिए आपकी अपने पर्सनल डेस्टाइन्ड फिक्स कर्माज़ की पूर्ण जानकारी।

इसलिए “अपनाइए अपना ‘कोड ऑफ कर्मा’, जिससे बनता है मनचाहा भाग्य भविष्य अपना”

Mission to Establish Karmology, Nothing Else

Whole universe of the physical world and the physical body of this subtle universe is made of five elements and three qualities. If we can tune our five elements and three gunas by the knowledge of our fixed Karmas then our all seven chakras energy will give us favourable effect and then only the energy of all the planets and Zodiac sign will keep on changing.

Our all the fixed Karma can be extracted from our personal fixed things which never changes. These are the elevated lines of our palm, feet, thumb and finger prints which are never similar to any other person. It is like a QR code in different persons — so with the graphic study of the human soul, the ethric codes of our past life are extracted, then our personal and physical body genetic codes are removed from it.

Earth, water, fire, air, sky — all these five elements and three gunas like satogun, rajogun and tamogun makes the whole universe. With these eight physical elements our physical body is formed. Every human body has different proportion of all these eight elements. As every tune is made of seven sur to produce infinite musical notes, in the same manner these eight elements produces countless bodies. The fixed karmas of a person can be known by the technical counting and graphic study which has given him the birth as human. He or she is the only one who has taken birth to enjoy or suffer his own fixed karmas, no one can share it, it is mandatory for him only. If he does it, it is his own religion — otherwise it is non-religious for him. The knowledge of these fixed karmas is known as karmology. Code of karma is prepared with the help of the codes which are taken from the study of the prints of your body.

All the religious rules are uniformly fixed for everyone according to their evil and holy — these are called karmas which are scripted in all the religious books. Likewise religion is the karma for all, but the elevated lines of the universe, magnetic circuit, friction, raised thumb and finger prints on your hand at the time of birth are your personal lines. The study of all these codes and your fixed karmas are the destined fixed karmas as scripted in Geeta. Your own personal code of karma is made with the study of your personal nature of three gunas — satogun, rajogun and tamogun — and five elements. If you follow this code of karma and get enriched with the knowledge of your karma then you will be helpful to yourself. It is perfect to understand what is beneficial for you or what is not. In this manner, if you adopt it in your daily routine, your life will get positive energy and your body, your personality will be full of positivity and negativity will never enter in your life.